भूतिया सारयू घाट हिंदी कहानी

 



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       भूतिया सारयू घाट

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दिसंबर के ठंडे मौसम के दिन थे। रोहन, अनिका और उनके दोस्त रितिक ने अपनी छुट्टियों का लुत्फ उठाने के लिए सारयू घाट पर घूमने का फैसला किया। इस सारयू घाट को लेकर कई भूतिया किस्से और लोककथाएं सुनते थे लेकिन उनके दिल में इस पर विश्वास नहीं था। उन्होंने सोचा कि यह सब केवल किस्से हैं और वहां घूमकर आनंद उठाएंगे।



दोस्तों के साथ रास्ते में चुट्टी के बारे में बातें करते हुए, वे सारयू घाट पहुंच गए। यहां पर देवी जी की मूर्ति थी, और लोग उसके सामने पूजा करते थे। रितिक और अनिका ने भी वहां जाकर पूजा की।



तभी एक बुढ़िया उनके पास आई। वह भूतों के रहस्यमयी किस्से सुनाने वाली दिखती थी। उसने कहा, "बच्चों, यहां रात को भूतों के अद्भुत खेल देखे जाते हैं। यहां अजीब-ग़रीब चीजें होती हैं।"



रोहन और उसके दोस्त इस बुढ़िया के बातों में विश्वास नहीं करते थे। उन्होंने उसे अच्छा-अच्छा कहकर उसकी बातें नज़रअंदाज़ कर दी।



रात के आने से पहले, वे अपने तमाम चुट्टी के यादें बनाते रहे। रात को जब उन्होंने खाना खाने के बाद अपने टेंट में आराम किया तो बुढ़िया उन्हें फिर से याद आ गई।



थोड़ी देर बाद रात के अंधेरे में, उन्होंने खुद को भूतों के लिए तैयार किया और देखने के लिए सारयू घाट निकल दिया।



सारयू घाट पर पहुंचकर, उन्होंने अपने दोस्तों को बुलाया और बुढ़िया के कहने पर देवी जी की मूर्ति के सामने पूजा करना शुरू किया।



तभी रात की अंधकार में वे कुछ अजीब आवाज़ें सुनने लगे। उन्होंने एक टेंट बना लिया और अंदर चले गए। वे टेंट के बाहर आग जला कर चल रहे भूतों की आवाज़ों को सुनते रहे।



धीरे-धीरे भूतों की आवाज़ें बढ़ती जा रही थीं और उनके दिल की धड़कनें भी तेज होने लगी थीं। रितिक और अनिका का मन भी डर से डर जा रहा था


भूतिया सारयू घाट

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Horror story in hindi

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भूतिया सारयू घाट

दिसंबर के ठंडे मौसम के दिन थे। रोहन, अनिका और उनके दोस्त रितिक ने अपनी छुट्टियों का लुत्फ उठाने के लिए सारयू घाट पर घूमने का फैसला किया। इस सारयू घाट को लेकर कई भूतिया किस्से और लोककथाएं सुनते थे लेकिन उनके दिल में इस पर विश्वास नहीं था। उन्होंने सोचा कि यह सब केवल किस्से हैं और वहां घूमकर आनंद उठाएंगे।

दोस्तों के साथ रास्ते में चुट्टी के बारे में बातें करते हुए, वे सारयू घाट पहुंच गए। यहां पर देवी जी की मूर्ति थी, और लोग उसके सामने पूजा करते थे। रितिक और अनिका ने भी वहां जाकर पूजा की।

तभी एक बुढ़िया उनके पास आई। वह भूतों के रहस्यमयी किस्से सुनाने वाली दिखती थी। उसने कहा, "बच्चों, यहां रात को भूतों के अद्भुत खेल देखे जाते हैं। यहां अजीब-ग़रीब चीजें होती हैं।"

रोहन और उसके दोस्त इस बुढ़िया के बातों में विश्वास नहीं करते थे। उन्होंने उसे अच्छा-अच्छा कहकर उसकी बातें नज़रअंदाज़ कर दी।

रात के आने से पहले, वे अपने तमाम चुट्टी के यादें बनाते रहे। रात को जब उन्होंने खाना खाने के बाद अपने टेंट में आराम किया तो बुढ़िया उन्हें फिर से याद आ गई।

थोड़ी देर बाद रात के अंधेरे में, उन्होंने खुद को भूतों के लिए तैयार किया और देखने के लिए सारयू घाट निकल दिया।

सारयू घाट पर पहुंचकर, उन्होंने अपने दोस्तों को बुलाया और बुढ़िया के कहने पर देवी जी की मूर्ति के सामने पूजा करना शुरू किया।

तभी रात की अंधकार में वे कुछ अजीब आवाज़ें सुनने लगे। उन्होंने एक टेंट बना लिया और अंदर चले गए। वे टेंट के बाहर आग जला कर चल रहे भूतों की आवाज़ों को सुनते रहे।

धीरे-धीरे भूतों की आवाज़ें बढ़ती जा रही थीं और उनके दिल की धड़कनें भी तेज होने लगी थीं। रितिक और अनिका का मन भी डर से डर जा रहा था, लेकिन



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भूतिया सारयू घाट

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शुरुआत में, रोहन, अनिका, और रितिक को लगा कि वे खुद को बस किस्सों में खोए हुए हैं और उनका दिमाग उनके साथ हो रहे खतरनाक भूतिया घटनाओं का असर है। वे एक-दूसरे को समझाने का प्रयास करते हैं, लेकिन दिल में अजीब डर छा जाता है।

जब रात के अंधेरे और भयानक शोर-शराबे से घिरा घाट था, उन्होंने टेंट में चुपके से अपने कुंडली निकली। भूतों के डरावने किस्सों से उन्होंने सीखा था कि इस तरह के समय में अपनी कुंडली निकालना उन्हें अधिक सुरक्षित बना सकता है। लेकिन जैसे ही उन्होंने अपनी कुंडली देखी, वे चकरा गए। कुंडली में कुछ अशुभ संकेत थे जो उन्हें अगामी खतरे की चेतावनी देने लगे।

भूतों की आवाज़ें और अनदेखी शक्तियों के खोले जाने वाले राज से घबरा जाते हुए, वे रात भर उन्हीं टेंट में बिताने का फैसला करते हैं। परन्तु उनका तनाव और अवसाद इस रात को बनाए रखने के लिए नहीं होता। उन्होंने डरे हुए मन से एक-दूसरे की कहानियों से शक्ति लिया और प्रतियोगिता दिखाने का विचार किया।

धीरे-धीरे रात बितती गई और सारयू घाट में अद्भुत घटनाएं बढ़ती गईं। भूतों की कहानियों के अलावा, अनजाने दिखाई देने वाले आत्मा की सीढ़ियां, अनदेखी छाया के बदले आती-जाती पायलें, और रात के अंधेरे में झिलमिलाते हुए आँखों का दिखना उन्हें भयानक लगने लगा।

अनिका के आँखों में एक प्रतीक्षा सी थी, वह वाकई एक भूतिया आत्मा को देखना चाहती थी, लेकिन वह इस तरह की भयानक वातावरण में पकड़ नहीं जाना चाहती थी।

रात की धीरे-धीरे बढ़ती घड़ियों के साथ, वे सभी विक्टरियस बनाने के लिए संयमित बने रहे। उनकी आत्मा द्वारा भावनाओं के संगम से उन्होंने एक साथ खड़े होने का साहस दिखाया।

सुबह के आसमान में सूर्य की किरणें आने के साथ, उनका डर और अवसाद धीरे-धीरे गायब हो गया। वे एक दूसरे को धीरे-धीरे हँसाने लगे.



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